विभाग के कार्यकलाप |
राज्य में सतत व समग्र नियोजित विकास की प्रक्रिया को वांछित दिशा देने हेतु वर्ष 1964 में राज्य सरकार द्वारा नगर नियोजन विभाग का गठन किया गया। नगर नियोजन विभाग द्वारा राज्य में नियोजित नगरीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निम्न मुख्य कार्य सम्पादित किये जाते हैः |
| राजस्थान के शहरों/कस्बों के नियोजित विकास हेतु मास्टर प्लान तैयार करना। |
| केन्द्र प्रवर्तित लधु एवं मध्यम कस्बों की एकीकृत विकास योजना (आईडीएसएमटी) के तहत स्थानीय निकायों को प्रोजक्ट क्रियान्वयन में सहयोग व मोनेटरिंग करना। |
| राज्य के स्थानीय निकायों के लिये आवासीय, व्यावसायिक व अन्य उपयोगो के लिए स्कीम व प्रोजक्टस तैयार करने में तकनिकी सहयोग प्रदान करना व तकनिकी अनुमोदन रेग्यूलेशन इत्यादि तैयार करना। |
| नगरीय विकास की प्रक्रिया में स्थानीय निकायों व राज्य सरकार के मध्य समन्वयक के रूप में कार्य करना। |
| राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय योजना के तहत राजस्थान उप क्षेत्रीय योजना बनाना व एस.सी.आर प्लानिंग बोर्ड व स्थानीय |
| भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित प्रकरणों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्यवाही सम्पादित करना। |
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एनयूआईएस एवं आरयूआईएस योजनाओं के माध्यम से नगरों के बेसमेप व आवश्यक सूचना को तैयार करवाकर स्थानीय निकायों के लिए उपलब्ध करवाना।
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विभाग का प्रशासनिक व्यवस्था |
| नगर नियोजन विभाग का मुख्यालय जयपुर में स्थित है एवं मुख्य नगर नियोजक राजस्थान इनके विभागाध्यक्ष है। विभाग के कार्यों का सुगमता पूर्वक संचालन करने के उद्देश्य य से राज्य में 6 जोनल कार्यालय जयपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर एवं जोधपुर तथा 2 क्षेत्रीय कार्यालय अलवर व भरतपुर में स्थापित है। इसके अतिरिक्त विभाग से नगर नियोजकों का पदस्थापन अन्य विभागों यथा, राजस्थान आवासन मण्डल, नगर विकास न्यासों, जयपुर विकास प्राधिकरण, जोधपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगमों, नगर परिषदों मार्केटिंग बोर्ड, रीको आदि में किया जाता है। इन अधिकारियों द्वारा नियोजित विकास की दृष्टि से प्रचलित नियम/ उपनियम, राज्य सरकार के नीतियों के तहत कार्यों का सम्पादन किया जाता है। |